Nawa Ipil - A magazine for the progressive adivasi youth

Your favourite magazine Nawa Ipil set for a re-launch in a digital avatar !!

Same legacy..... in a new package....

Dear Subscribers and Readers,

First of all, I would like to thank every subscriber and supporter who stood beside us since the beginning of this magazine in 2006. The magazine had a humble beginning back then. Meanwhile with time, Nawa Ipil and team went through a lot of changes and a lot of turmoil. We faced some hard times when we were not able to stand up to your expectations by publishing the issues on time. There were challenges both financial and logistics which we gradually learned from and ultimately won over.

Now I am happy to announce the re-launch of Nawa Ipil in a digital avatar, with improved distribution system, better online presence and better print version. We are too excited to see what the response of our readers will be. I hope our efforts will be appreciated. As it is a community magazine we are dependent on you all to contribute and share your articles in order to make it a success. Please share your views, articles and suggestions, both on mail and through the discussion forums which will be activated soon on the website.

With changing times we decided to broaden our horizons and include all adivasis/tribals/ indigenous people as our audiences as our struggle for existence are the same, our cultures have striking similarities and our paths to development are also the same. Joining hands would not only increase our support base but also enable everyone to reap benefits from this endeavour of ours.Therefore “Nawa Ipil – A Quarterly Journal on Santals” is now “Nawa Ipil – A Quarterly Journal on Adivasis”.

We will also be launching a youtube video channel of Nawa Ipil where the users will be able to upload video reportings of various news from their areas.Using this youtube channel our news can be seen by various state and central government as well as national and international agencies which can help in solving our problems.

Apart from this there will be a discussion forum under the tab “Speak Up !” which will provide a space for us to discuss and deliberate on various issues concerning us. We have also provided a shopping cart from where the readers can order Nawa Ipil subscriptions online. Not only will this shopping cart help in selling Nawa ipil but we will also collaborate with other similarly published magazines and books from adivasis to sell their publications. This e-commerce platform will also collaborate with other local art and craft makers in our rural areas who struggle for market availability and are forced to sell at very low prices. We shall help them sell on our platform and help them make it a regular and stable source of income for them.

With the launch of Nawa Ipil, I must say it will be a new beginning in the way we adivasi speak to the world. It is our own platform. Let’s make it a place where our youth interacts , contributes as well as learns while contributing back to the society through this small endeavour of ours.
Cheers !!

-Prashant Kumar Hembrom

Team Nawa Ipil


प्रिय पाठकों ,

सबसे पहले मैं धन्यवाद देना चाहूँगा सभी लोगों को और समर्थकों को जिन्होने हमारा 2006 की हमारी शुरुआत से अब तक साथ दिया है । इस पत्रिका ने उस समय एक छोटे से पायदान से शुरुआत की थी । समय के साथ साथ Nawa Ipil और इसकी टीम बहुत सारे बदलावों और उंच-नीच से हो कर गुजरी । बहुत बार ऐसे मौके आए जब हम आपकी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतार पाये और समय से अपने अंक प्रकाशित नहीं कर पाये । हमारे सामने कई तरह की बाधाएँ आयीं – आर्थिक से लेकर वितरण संबंधी समस्याएँ , पर धीरे धीरे हम सभी समस्याओं से सीखते गए और जीतते गए ।

आज मैं खुश हूँ आपके समक्ष Nawa Ipil का डिजिटल प्रारूप रखते हुये , जिसकी हमने वितरण प्रणाली सुधारी है , ऑनलाइन उपस्थिती सुधारी है और प्रिंट का प्रारूप भी सुधारा है । हम बेहद उत्साहित है आप सभी पाठकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए और आशा करते हैं कि आपकी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे । एक सामाजिक पत्रिका होने के नाते अपनी सफलता के लिए यह आप पाठकों के सहयोग , आपके द्वारा भेजे गए आलेखों और फोटो पर ही निर्भर है । कृपया अपने विचार और सलाह हुमें ईमेल के द्वारा या Speak Up tab के द्वारा Discussion forum में जरूर दें ।

समय के साथ हमने अपने क्षितिज को और बड़ा करने का फैसला लिया और अपने पाठकों में सारे आदिवासियों को शामिल करने का फैसला लिया , चूंकि हमारी अस्तित्व की लड़ाई एक है , हमारी संस्कृतियाँ एक समान हैं और हमारी उन्नति का रास्ता भी एक है । इससे न केवल हमारी ताकत बढ़ेगी बल्कि Nawa Ipil की इस वैबसाइट से सभी लोग फायदा उठा पाएंगे । इस कारण से “Nawa Ipil – A Quarterly Journal on Santals” अब है “Nawa Ipil – A Quarterly Journal on Adivasis”.

इसके साथ ही हम एक Youtube विडियो चैनल भी शुरू करने जा रहे हैं जहाँ हम पाठकों द्वारा भेजे गए विभिन्न इलाकों की विडियो खबरें दिखाएंगे । इस विडियो चैनल के द्वारा हमारी खबरें न सिर्फ हमारी राज्य सरकारों तक बात पहुंचेगी , बल्कि केंद्र सरकार , अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियाँ और संयुक्त राष्ट्र भी इंटरनेट के माध्यम से हमारी खबरें देख पाएंगे ।

इनके अलावा इस साइट पर एक ‘Speak Up’ का अनुभाग भी रहेगा जो हम सबको एक मंच देगा जहां हम आदिवासियों से संबन्धित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श कर पाएंगे । साथ ही साथ हमने इस साइट पर एक खरीद-बिक्री का अनुभाग भी रखा है जहां से न केवल हम Nawa Ipil के अंक बेच पाएंगे बल्कि आदिवासियों से संबन्धित अन्य प्रकाशनों को भी बेच पाएंगे । इसके अलावा हम ग्रामीण क्षेत्रो के कारीगरों के बनाए कलाकृतियों और अन्य उत्पादों को भी बेच पाएंगे और उनको जिनको अपने उत्पाद बेचने के लिए बाज़ार उपलब्ध नहीं था उनको यह सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें आजीविका कमाने का नियमित और स्थायी साधन देंगे ।

Nawa Ipil के इस नए आरंभ के द्वारा एक नए तरीके की शुरुआत होगी जिससे हम आदिवासी बाकी दुनिया से बात कर सकेंगे । यह हमारा अपना एक मंच होगा । आइये हम मिलकर इसे एक ऐसा मंच बनाएँ जहां हमारा युवा मुद्दों पर मनन-चिंतन करे, अपनी बात उठाए, सीखे और सिखाये और अपने समाज के लिए अपना योगदान दे ।

जय हिन्द !

प्रशांत कुमार हेम्ब्रम

Team Nawa Ipil

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