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Citizen Journalism – जन पत्रकारिता: Why do tribals need it?

आदिवासियों की अपनी आवाज़ .... अपना न्यूज़ चैनल

(I shall be using the terms indigenous/tribal/Adivasi interchangeably in this article, reason being each of them have their own significance, advantages as well as disadvantages. These can be read in my next article on these terminologies. For now you may please proceed with the article below)

In a time when the indigenous tribes of India have almost lost faith in their elected leaders, the news media, the judiciary and the administration, there has to be a way for them to communicate to the world their plights, their stories, their views, their culture and customs, the atrocities done on them and the injustices they face.

The problem had started with the shy nature of the adivasis when the tribal communities refused to intermingle with other communities. They were self sufficient in food grains and other things necessary for life and they did not have the need to be involved in trade with other communities. This slowly and steadily deteriorated the economic conditions of tribals as their wants and needs increased with time and the list of basic necessities grew from ‘roti, kapda aur makan’ to include mobile, bike etc. also. However to sell they had only their agricultural produce which was not valued much in the market. Blatant casteism and many other types of oppressive practices further prevented the adivasis from progressing at the same pace with other communities of India. With the advent of the rampant industrialization and discovery of precious mineral below their agricultural lands started the problems of illegal mining and displacement. While these indigenous communities were already facing the challenges of health and education, casteism , human trafficking, the problems were made worse when the capitalist forces started working hand-in-glove with the administration to deprive them of basic facilities provided by the government like primary education , rural health care etc. Incidents of corruption, gross violations of human rights further gave rise to insurgency and Naxalism in these areas.

Despite all these issues even the news media didn’t bother to give much of coverage to the issues of the tribals. The private news channels are presently more interested in some starlets doing publicity stunts than highlighting the atrocities done on tribals and dalits in order to get justice for them. Journalism, once upon a time, used to be a medium to attract the attention of the world so that justice could be demanded. Sadly now it’s just a complimentary side-business of politics.

It is because of this reason the Adivasis need their own platform, their own news media, their own channel where they can raise their voices against the issues being faced by them. They need a platform to show the world that they are not savages as portrayed in recent Indian films. They need a platform to capture the attention of the world about the human rights violations done here. They need a platform to speak up ! Against their oppressors, capitalists who deny them justice, corrupt politicians and administrative officers……ana

And because of the same reason Nawa Ipil was set-up. To showcase the world of the tribals to the outer world. We, the team of Nawa Ipil, will help you to be heard …. not only across India, but across the whole world. You just need to record a short video of 1-3 minutes explaining the exact problems and send it to us. It can be anything in the form of an interview of locals describing the problem, a sting video on any corrupt official or any imaginative way you can think of to show your problems to the world through your video. The videos must be to the point and clear, stating facts (no rumours please), preferable shot with a mobile camera/digital-camera of minimum 3 Megapixel resolution. Please don’t forget to mention your name, your cameraman’s name (if you are in front of the camera and someone else is shooting it) and the name of the place at the last of the video. In case the submitter of the video asks for anonymity , the same will be provided by blurring the faces / removing the names from the audio. The clips will be edited if required to focus on the main points. The videos must be in English or Hindi because we need to communicate the message to the others, not all of whom may understand our regional languages. In cases where interviewing rurals in hindi is not possible, please provide us with a transcript of the interview.

Following is the link to upload your videos: https://www.dropbox.com/request/TNs9FmqWB9l4pz1MCF9R

Your submitted news can be viewed at this page: https://www.youtube.com/watch?v=bmbQU54931M&list=PLkExaKMRNbKsa8Sq50PZZtA6K0Zwc2T5U

Further all your other articles are also welcome as mentioned in this article. Click here to read how you can submit articles.

 

(मैं इस आलेख मे indigenous/tribal/आदिवासी शब्द का प्रयोग समानार्थक रूप से करूंगा , चूंकि इनमे से हर एक अपना एक अलग महत्व , अलग-अलग फायदे और नुकसान हैं । इन को जानने के लिए पढ़ें मेरा अगला आलेख जो जल्द ही प्रकाशित होगा । फिलहाल आपके सामने प्रस्तुत है मेरा यह आलेख )

आज के समय मे जब हमारी indigenous tribe अपने नेताओं पर से, मीडिया से , न्यायपालिका से और प्रशासन से भरोसा खो चुकी है , कोई तो ऐसा रास्ता होना चाहिए उनके लिए जिससे वो अपनी दुर्दशा , अपनी कहानियाँ , अपने विचार , अपनी संस्कृति और रीति-रिवाज़ , अपने ऊपर होने वाले जुल्म और अन्याय को दुनिया को दिखा सकें ।

समस्या तब से शुरू हुयी थी जब हम आदिवासी अपने शरमीले स्वभाव के कारण बाहरी दुनिया से मेल –मिलाप करने से कतराते थे । हमारे पास अपने जीने के लिए अनाज और बाकी पर्याप्त साधन थे और किसी भी चीज़ के लिए दूसरे समुदाय से सौदे और व्यापार की जरूरत नहीं थी । इस चीज़ ने धीरे धीरे हम आदिवासियों की आर्थिक स्थिति बिगाडनी चालू कर दी और हमारी जरूरतें धीरे धीरे बढ़ती गईं , जो पहले रोटी, कपड़ा और मकान से पूर्ति हो जाती थी उस जगह अब मोबाइल फोन और मोटर-साइकिल इत्यादि ने ले ली । लेकिन इन चीजों को खरीदने के लिए हम आदिवासियों के पास सिर्फ अपनी शारीरिक मजदूरी थी या निम्न स्तर का उगाया हुआ अनाज जिसका बाजार भाव कुछ नहीं मिलता था । ऊपर से घोर जातिवाद और अन्य दमनकारी प्रथाओं ने हम आदिवासियों का बाकी समुदायों के समानान्तर उन्नति के मार्ग को और अवरूद्ध कर दिया । फिर औद्योगीकरण का उदय हुआ और हमारी ज़मीनों के नीचे बहुमूल्य खनिज मिले , जिससे गैरकानूनी खनन और विस्थापन की समस्या बढ़ी । जब हमारा आदिवासी समुदाय स्वास्थ्य , शिक्षा , जातिवाद , मानव तस्करी जैसी समस्याओं से पहले से जूझ रहा था , तब पूंजीवादी ताकतों ने प्रशासन के साथ मिलकर हमें सरकार की ओर से मिलने वाली बुनियादी जरूरतें जैसे प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी छीन लीं । बढ़ते भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के घोर उलंघन ने फिर विद्रोह और नकसलवाद को जन्म दिया ।

इन सारी चीजों के होने के बावजूद यहाँ का न्यूज़ मीडिया ने आदिवासियों की समस्याओं को सामने लाने की दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया । प्राइवेट न्यूज़ चैनल भी आजकल आदिवासियों और दलितों की समस्याओं के ऊपर खबरें दिखाने की बजाए सितारों की पब्लिसिटी स्टंट की खबरें दिखाने के लिए ज्यादा लालायित रहते हैं । पत्रकारिता जो कभी जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए जुल्म की तरफ दुनिया का ध्यान आगाह करने का कार्य करती थी अब राजनीति के धंधे का ही छोटा हिस्सा बन गया है ।

इसलिए आदिवासियों को अपने एक मंच की जरूरत है , अपने एक मीडिया हाउस , अपने एक चैनल की जरूरत है जिससे वो अपनी आवाज़ उठा सकें खुद से संबन्धित मुद्दों को लेकर । उन्हे एक मंच की जरूरत है ताकि वो दुनिया का ध्यान आकर्षित कर सकें और बता सकें की वो असभ्य नहीं हैं जैसा उन्हें आजकल की फिल्मों मे दिखाया जाता है । उन्हे एक मंच की जरूरत है जहां से वो दुनिया को बता सकें की उनके साथ मानवाधिकार ऊलंघन की कितनी घटनाएँ हो रही हैं । उन्हें आवाज़ उठाने के लिए एक मंच की जरूरत है ! दमन करने वालों के खिलाफ़ , पूंजीवादियों के खिलाफ़ जो उन्हे इंसाफ से वंचित रखते हैं , भ्रष्ट नेताओं और घूसखोर प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ़ ।

और इसी कारण से Nawa Ipil को खड़ा किया गया । ताकि हम आदिवासियों की दुनिया को बाकी दुनिया के सामने रखा जा सके । हम , और हमारी Nawa Ipil टीम आपकी मदद करेंगे दुनिया तक आपकी आवाज़ पहुंचाने में ….. न सिर्फ भारत देश मे बल्कि पूरी दुनिया मे । आपको बस एक छोटा 1 – 3 मिनट का विडियो क्लिप बनाकर उसके द्वारा अपनी समस्या बतानी है और हमें भेज देना है । ये किसी भी प्रकार से बनाया जा सकता है जैसे स्थानीय ग्रामीणों का इंटरव्यू हो सकता है या फिर किसी भ्रष्ट अफसर का स्टिंग विडियो या फिर आपकी परिकल्पना के अनुसार कोई भी विडियो जिससे आप अपनी समस्या को दुनिया के सामने रखना चाहें । ये विडियो स्पष्ट और प्रासंगिक होने चाहिए और इससे आपकी समस्या साफ-साफ समझ में आनी चाहिए । कोई अफवाह न हो और सिर्फ तथ्य होने चाहिए । स्पष्ट विडियो के लिए अच्छा होगा अगर कम से कम 3 megapixel वाला डिजिटल कैमरा या मोबाइल कैमरा प्रयुक्त किया जाए । विडियो के अंत मे अपना नाम और अपने कैमरामैन का नाम (अगर कोई दूसरा आपकी शूटिंग कर रहा हो तो) और जगह का नाम जरूर बतायें । जरूरत पड़ने पर आपके द्वारा दिये गए क्लिप को विषय पर फोकस बनाए रखने के लिए संपादित किया जा सकता है । अपप्के अनुरोध के अनुसार अगर किसी को अपने नाम या चेहरे की गोपनियता बनाए रखने की जरूरत होगी तो उसका भी ध्यान रखा जाएगा । आपके द्वारा भेजे गए विडियो अँग्रेजी या हिन्दी मे ही होने चाहिए ताकि हम सरकार , भारत की जनता और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया तक आपकी आवाज़ पहुंचा सकें जो शायद आपकी क्षेत्रीय भाषा ना समझते हों । क्षेत्रीय भाषा वाले विडियो के साथ कृपया उसका हिन्दी या अँग्रेजी मे अनुवाद जरूर भेजें ।
अपने विडियो को इस लिंक पर अपलोड करें : https://www.dropbox.com/request/TNs9FmqWB9l4pz1MCF9R
आपके द्वारा भेजे गए विडियो को इस पेज पर देखा जा सकता है : https://www.youtube.com/watch?v=bmbQU54931M&list=PLkExaKMRNbKsa8Sq50PZZtA6K0Zwc2T5U

इसके अलावा आपके अन्य आलेख या क्षेत्रीय समाचार का भी स्वागत है । अपने आलेखों को कैसे भेजना है यह जानने के लिए यहाँ क्लिक करें ।

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